शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

एक और निर्भया:वो शरीर नोंच रहा था, चीखी तो उसने कई बार सिर पर पत्थर मारे; मैं गिड़गिड़ाई- रेप कर लो, नहीं चिल्लाऊंगी पर जान से मत मारो


  • पुलिस इसे सिर्फ छेड़छाड़ का मामला बता रही है, आरोपी को पीड़ित के सामने नहीं ला रही
  • लड़की की मां ने पिछले मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मदद मांगी
  • भोपाल के कोलार इलाके में रहने वाली 24 साल की निक्की (बदला हुआ नाम) से 16 जनवरी को जेके हॉस्पिटल के पास सड़क किनारे दुष्कर्म की कोशिश की गई। निक्की ने विरोध किया तो आरोपी ने सिर पर पत्थर पटक दिया। धक्के से गिरी तो रीढ़ की हड्‌डी टूट गई। एम्स में ऑपरेशन हुआ, 42 टांके आए, लेकिन अब वो हिल भी नहीं सकती। पहली बार निक्की ने भास्कर को आपबीती सुनाई...

    'मैं 16 जनवरी की शाम करीब 7.30 बजे हर रोज की तरह ईवनिंग वॉक पर निकली थी। जेके हॉस्पिटल से दानिशकुंज चौराहे की ओर सड़क किनारे जा रही थी, तभी अस्पताल से करीब 200 मीटर आगे नर्सरी के पास सामने से एक लड़का आता दिखा। करीब आते ही उसने तेजी से धक्का मारा। मैं सीधे सड़क किनारे पांच फीट गहरी खंती में गिरी। रीढ़ की हड्‌डी टूट गई। मैंने जैकेट छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उसने झटके से मुझे झाड़ियों में पटक दिया। वो मेरा शरीर नोंचने लगा, दांतों से काटने लगा। वो दुष्कर्म की कोशिश कर रहा था। मैं हाथ-पैर चलाकर बचती रही, लेकिन वो पीट रहा था।'

    'मैं चिल्लाई तो उसने पत्थर उठाकर सिर पर कई बार मारा। मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या करूं। एक पल लगा कि ये मुझे जिंदा नहीं छोड़ेगा, इसलिए जान बचाने के लिए गिड़गिड़ाई- तू रेप कर ले, नहीं चिल्लाऊंगी, न किसी को फोन करूंगी। लेकिन पत्थर मत मारो। थोड़ी सांस तो लेने दो। उसने पत्थर मारना बंद कर दिया, पांच मिनट तक शरीर से बदसलूकी करता रहा। मैं हेल्प-हेल्प चिल्लाई। शुक्र है कि मेरी आवाज वहां से निकल रहे एक युवक-युवती ने सुन ली। दोनों झाड़ियों में घुस आए। दरिंदा उन्हें देखते ही मुझे अधमरा छोड़ भाग गया।'



Rea es:
SHARE THIS

Author:

Etiam at libero iaculis, mollis justo non, blandit augue. Vestibulum sit amet sodales est, a lacinia ex. Suspendisse vel enim sagittis, volutpat sem eget, condimentum sem.

0 coment rios:

Hi friends